धर्म की राह से पीछे हटीं महाकुंभ की हर्षा रिछारिया, बोलीं-मैं मां सीता नहीं, जो अग्नि परीक्षा दूंगी

Edited By suman prajapati, Updated: 13 Jan, 2026 05:44 PM

mahakumbh fame harsha richhariya announced she is abandoning the religion path

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हर्षा रिछारिया महाकुंभ के मेले के दौरान खूब सुर्खियों में आई थीं, जहां उनकी खूबसूरती की खूब तारीफें हुईं थीं। उनकी ब्लू आंखें और लंबे घने बालों ने लोगों का खूब ध्यान आकर्षित किया था। उन्हें महाकुंभ की सबसे खूबसूरत साध्वी कहा...

 मुंबई  सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हर्षा रिछारिया महाकुंभ के मेले के दौरान खूब सुर्खियों में आई थीं, जहां उनकी खूबसूरती की खूब तारीफें हुईं थीं। उनकी ब्लू आंखें और लंबे घने बालों ने लोगों का खूब ध्यान आकर्षित किया था। उन्हें महाकुंभ की सबसे खूबसूरत साध्वी कहा गया था। वहीं, अब इस साध्वी ने एक बड़ा फैसला लिया है। हाल ही में उन्होंने ऐलान किया है कि वह धर्म की राह से पीछे हट रही हैं।

हर्षा रिछारिया का कहना है कि इस दौरान उन्हें लगातार विरोध, मानसिक दबाव और चरित्र हनन का सामना करना पड़ा, जिससे उनका मनोबल पूरी तरह टूट गया।
हर्षा रिछारिया ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह कहती दिखीं- 'प्रयागराज महाकुंभ 2025 से शुरू हुई एक कहानी, जो अब खत्म हो रही है, या खत्म होने को है। एक साल में मैंने काफी विरोध का सामना किया है। प्रयागराज से शुरू हुआ था वो विरोध, लगा था कि अब खत्म होगा, महाकुंभ के बाद खत्म होगा, लेकिन मैंने धर्म के रास्ते पर चलते हुए जो कुछ भी करने की कोशिश की मेरा विरोध हुआ। मैं कोई गलत काम नहीं कर रही थी, मैं कोई चोरी नहीं कर रही थी, मैं कोई रेप नहीं कर रही थी।मैं जो भी धर्म के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए कर रही थी उसे रोका गया।' 
  
 

उन्होंने आगे कहा, 'मेरा मनोबल तोड़ा गया, जिनको लगता है कि मैंने महाकुंभ के जरिए धर्म को धंधा बनाकर करोड़ों रुपये छाप लिए मैं आज बहुत उधारी में हूं। इस रास्ते में आने से पहले में एक एंकर थी। मैं बहुत प्राउड थी, बहुत खुश भी थी। अच्छा खासा पैसा कमा रही थी। सबसे बड़ी बात किसी का साथ भी नहीं है। मुझे रोका गया है। विरोध किया गया। माघ मेले में भी मेरे साथ ऐसा हुआ और एक लड़की के साथ अगर आप उसका मनोबल नहीं तोड़ पा रहे हो तो उसका चरित्र हनन कीजिए। फिर तो वो टूटेगी ही।

 


उन्होंने कहा- आप अपना धर्म अपने पास रखिए, मैं मां सीता नहीं हूं जो अग्नि परीक्षा दूंगी। मैंने जो अग्नि परीक्षा देनी थी वो दे दी। अब माघ मेले में मौनी अमावस्या में मैं स्नान करूंगी और जो मैंने धर्म की राह पर चलने का संकल्प किया था, उसे विराम दूंगी। वापस अपना पुराना काम करूंगी।

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