फिल्म ‘ओ रोमियो’ को मुंबई कोर्ट से बड़ी राहत, रिलीज पर रोक लगाने वाली याचिका को किया खारिज

Edited By suman prajapati, Updated: 09 Feb, 2026 03:20 PM

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विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित फिल्म ‘ओ रोमियो’ जिसमें शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी मुख्य भूमिकाओं में हैं, को हाल ही में एक कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा। हालांकि, कोर्ट ने फिल्म के मेकर्स को बड़ी राहत दे दी है। मुंबई की एक अदालत ने फिल्म की...

मुंबई. विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित फिल्म ‘ओ रोमियो’ जिसमें शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी मुख्य भूमिकाओं में हैं, को हाल ही में एक कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा। हालांकि, कोर्ट ने फिल्म के मेकर्स को बड़ी राहत दे दी है। मुंबई की एक अदालत ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है और दिवंगत गैंगस्टर हुसैन उस्तारा की बेटी को दी गई अंतरिम राहत को भी रद्द कर दिया है।

 

मुंबई सिटी सिविल कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस समय फिल्म पर रोक लगाने का कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है। यह फैसला शनिवार को जज एच.सी. शेंडे ने सुनाया।

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मामला क्या था?

याचिकाकर्ता सनौबर शेख ने दावा किया था कि फिल्म की कहानी उनके दिवंगत पिता हुसैन शेख, जिन्हें हुसैन उस्तारा के नाम से जाना जाता था, के जीवन से मिलती-जुलती है। उनका आरोप था कि फिल्म में उनके पिता की पहचान, निजी जीवन और नाम का बिना अनुमति उपयोग किया गया है। उन्होंने कोर्ट से 13 फरवरी 2026 को फिल्म की रिलीज रोकने और इसे पहले दिखाने की मांग की थी।

याचिका में यह भी कहा गया कि फिल्म के टीजर, ट्रेलर और प्रचार सामग्री में ऐसे सीन और किरदार हैं, जो उनके पिता के जीवन से प्रेरित प्रतीत होते हैं।

फिल्म टीम का पक्ष

फिल्म के निर्माता और विशाल भारद्वाज की टीम ने अदालत को बताया कि ‘ओ रोमियो’ पूरी तरह से काल्पनिक कहानी है और इसमें किसी असली व्यक्ति पर आधारित किरदार नहीं है। साथ ही फिल्म में स्पष्ट डिस्क्लेमर भी दिया गया है, जो दर्शकों को यह बताता है कि कहानी काल्पनिक है।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने अपनी शुरुआती राय में कहा कि फिल्म के पात्र सीधे तौर पर याचिकाकर्ता के पिता पर आधारित प्रतीत नहीं होते। इसके अलावा, अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसके नाम और निजता से जुड़े अधिकार का कानून जटिल है और इसे तुरंत लागू करना आसान नहीं है।

अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिका रिलीज के बहुत करीब दाखिल की गई थी और फिल्म को पहले दिखाने की मांग करना सेंसरशिप जैसा प्रभाव डाल सकता था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी तरह का नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई मुआवजे के माध्यम से की जा सकती है।

अंततः अदालत ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि यह आदेश केवल शुरुआती है और अंतिम सुनवाई पर इसका कोई असर नहीं होगा।
 

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