फिल्म 'मुन्ना भाई MBBS' में नजर आ चुका ये शख्स अब दिखता है एेसा, हालात देख नहीं होगा यकीन

Edited By Punjab Kesari, Updated: 26 Mar, 2018 01:01 PM

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बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त की फिल्म ''मुन्नाभाई एबीबीएस'' में हर किरदार ने अपना दमदार अभिनय दिखाया था। इस फिल्म में एक एेसा किरदार था जिसे संजय दत्त ने सबसे पहले जादू की झप्पी दी थी। दरअसल हम बात कर रहे हैं फिल्म में मेडिकल कॉलेजे में झाड़ू-फटका लगाने...

मुंबई: बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त की फिल्म 'मुन्नाभाई एबीबीएस' में हर किरदार ने अपना दमदार अभिनय दिखाया था। इस फिल्म में एक एेसा किरदार था जिसे संजय दत्त ने सबसे पहले जादू की झप्पी दी थी। दरअसल हम बात कर रहे हैं फिल्म में मेडिकल कॉलेजे में झाड़ू-फटका लगाने वाले एक्टर सुरेंद्र राजन की। सुरेंद्र को अनिल कपूर की फिल्म लॉफर में भी जबरदस्त अभिनय में देखा गया था।

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लेकिन सुरेंद्र बॉलीवुड में सिर्फ अपने चेहरे से ही पहचान रखते हैं। लेकिन अब वह फिल्मों से दूर हो गए हैं। सुरेंद्र एक एक्टर होने के साथ-साथ एक चित्रकार और बहुत ही अच्छे फोटोग्राफर भी हैं। सुरेंद्र के जीने का अंदाज भी लोगों से अलग है। वह काफी घुमक्कड़ और बेफिक्री से जीने वाले इंसान है।

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सुरेंद्र के रहन सहन को देखने के बाद लोग उनको अजीब मान बैठे हैं। लेकिन सुरेंद्र का कहना है कि पैसों के पीछे भागना उनके लिए अजीब सा है। उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी एक गहरी बात भी बताई। बकौल सुरेंद्र 'मैंने कभी करियर जैसी चीज पर यकीन नहीं किया। मैंने काफी पहले सोच लिया था कि सिर्फ वही चीजें इकट्ठा करूंगा जो अपने साथ ऊपर ले जा सकूं।'

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बता दें कि 75 साल की उम्र में सुरेंद्र सबकुछ छोड़कर हिमालय में जा बसे हैं। पिछले चार साल से उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित हिमालय के सबसे आखिरी गांव खुन्नू में रह रहे हैं। खबर है कि चार साल बाद वह बाहरी दुनिया में आए हैं। इस दौरान उन्हें मध्य प्रदेश का दौरा किया।

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उन्होंने एक इंटरव्यू में अपनी जीवन शैली के बारे में खुलासा करते हुए बताया कि वह हिमालय में एक कच्चे मकान में रह रहे हैं जिसे उन्होंने एक रिटायर्ड फौजी से किराए पर लिया है। इस मकान में फौजी की एक चाय की दुकान थी। सुरेंद्र ने बताया कि यहां से गांव जाने में तकरीबन 17 किलोमीटर का फासला है। इसलिए तीन-चार महीने के अंतराल में वह अपनी जरूरतों का समान ले आते हैं। पास में नदी होने की वजह से पानी की भी कोई दिक्कत नहीं होती।

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इस वक्त सुरेंद्र की उम्र 80 साल की हो रही है और उनका कहना है कि उन्होंने जीवन के महत्व को बहुत पहले ही समझ लिया। इसलिए उन्होंने मोह-माया को त्याग एक साधारण जिंदगी को अहमियत दी। वह प्रकृति की गोद में रहकर बहुत ही खुश हैं। उनका यह भी कहना है कि उन्हें जीवन की सच्चाई का आभास हो गया था इसलिए उन्होंने अपना जीवन घूम-घूमकर बिताया। उनकी घूमने की आदत की वजह से उन्होंने 16 साल तक कोई कमरा किराए पर नहीं लिया। 
 

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