पहली बार शीशे में रानी पद्मावती का प्रतिबिंब देख बिगड़ी थी अलाउद्दीन खिलजी की नियत

Edited By Punjab Kesari, Updated: 14 Jul, 2018 04:30 PM

first time alauddin khilji seen rani padmavati in mirror

''पद्मावत'' एक भारतीय ऐतिहासिक फिल्म है जिसका निर्देशन संजय लीला भंसाली ने किया है। फिल्म में मुख्य भूमिका में दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह हैं। इस फिल्म में चित्तौड़ की प्रसिद्द राजपूत रानी पद्मावती का वर्णन किया गया है जो रावल रतन सिंह...

मुंबई: 'पद्मावत' एक भारतीय ऐतिहासिक फिल्म है जिसका निर्देशन संजय लीला भंसाली ने किया है। फिल्म में मुख्य भूमिका में दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह हैं। इस फिल्म में चित्तौड़ की प्रसिद्द राजपूत रानी पद्मावती का वर्णन किया गया है जो रावल रतन सिंह की पत्नी थीं। रानी पद्मावती को पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता था। वह चित्तौड़गढ़ की रानी थीं।

 

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कहा जाता है कि खिलजी वंश का शासक अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती को पाना चाहता था। रानी को जब ये पता चला तो उन्होंने कई अन्य राजपूत महिलाओं के साथ जौहर कर लिया। यह बात सुप्रसिद्ध इतिहासकार आर.वी. सिंह द्वारा लिखित राजपूताना का इतिहास नामक पुस्तक में भी दर्ज है। फिल्म पद्मावत 25 जनवरी को रिलीज हुई थी।  

 

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सुंदरता देखकर मोहित हो गया खिलजी

 

रानी पद्मावती चित्तौड़ की रानी थी। रानी पद्मावती के साहस और बलिदान की गौरवगाथा इतिहास में अमर है। सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी पद्मावती की शादी चित्तौड़ के राजा रतनसिंह के साथ हुई थी। रानी पद्मावती बहुत खूबसूरत थी और उनकी खूबसूरती पर एक दिन दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की बुरी नजर पड़ गई। रानी पद्मावती को पाने की ललक में खिलजी ने चित्‍तौड़ पर आक्रमण की ठानी।

 

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खिलजी ने एक चाल चली और रतनसिंह को पत्र लिख कर कहा की रानी पद्मावती को वह अपनी बहन समान मानता हैं और एक बार उनके दर्शन करना चाहता हैं इस पर रतनसिंह ने सहमती जताई और रानी पद्मावती कांच में अपना चेहरा दिखाने को राजी हो गईं।

 

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महल में लगे एक शीशे को इस तरह लगाया गया कि उसमें पद्मावती के स्थान पर खिलजी को सिर्फ प्रतिबिम्ब नजर आए। प्रतिबिम्ब में ही पद्मावती को देखते ही खिलजी की नीयत डोल गई और उसने बाहर निकलते समय छोड़ने बाहर तक आए रतनसिंह को पकड़ लिया। रतनसिंह की जान के बदले में खिलजी ने प्रस्ताव रखा कि पद्मावती को सौंपने के बाद ही वह रतनसिंह को रिहा करेगा।

 

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इस प्रस्ताव के बाद पद्मावती ने अपने सात सौ लड़ाकों को तैयार किया और प्रस्ताव भेजा कि वह दासियों के साथ खिलजी से मिलने आ रही है। सात सौ पालकियों में दासियों के स्थान पर लड़ाकों के साथ पद्मावती खिलजी के डेरे में पहुंची और हमला बोल दिया। देखते ही देखते रतनसिंह को आजाद करवा कर वह फोर्ट में लौट गईं।

 

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कहां हैं यह महल

 

रानी पद्मिनी का महल राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है। यह एक छोटा महल है, जो पानी के बीचों-बीच में बना हुआ है। इस महल को 'जनाना महल' भी कहते हैं, इसके बगल में एक बड़ा महल है जिसे 'मर्दाना महल' कहा जाता था। मर्दाना महल के एक कमरे में विशाल दर्पण इस तरह से लगा कि यहां से झील के मध्‍य बने जनाना महल की सीढ़ियों पर खड़े किसी भी व्‍यक्‍ित का स्‍पष्‍ट प्रतिबिंब दर्पण में नजर आता है। कहा जाता है अलाउद्दीन खिलजी ने यहीं खड़े होकर रानी पद्मावती का प्रतिबिंब देखा था।


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जौहर 


किले में मौजूद पद्मावती ने सोलह हजार राजपूत महिलाओं के साथ जौहर करने का निर्णय किया। सभी महिलाओं ने पहले गोमुख सरोवर में स्नान कर कुलदेवी की पूजा की। गोमुख के उत्तर में स्थित मैदान में जौहर तैयार करवाया गया।

 

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महारानी पद्मावती के नेतृत्व में सोलह हजार महिलाएं बारी-बारी से जौहर की चिता में कूद पड़ीं। कहा जाता है कि जिसके लिए खिलजी ने इतना युद्ध किया अंत तक भी वह रानी पद्मावती को देख नहीं पाया।

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