'हमने हर मुश्किल तेरा चेहरा देख-देख..सिद्धू मूसेवाला की पुण्यतिथि पर मां के कलेजे से निकले दिल तोड़ देने वाले बोल

Edited By suman prajapati, Updated: 29 May, 2025 12:58 PM

charan kaur gets emotional on third death anniversary of sidhu moosewala

आज का दिन पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए बेहद भावुक है, क्योंकि आज ही के दिन पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की गोलियों से मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी मौत की खबर ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया था और आज सिद्धू की पुण्यतिथि पर उनके फैंस की आंखें फिर...

मुंबई. आज का दिन पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए बेहद भावुक है, क्योंकि आज ही के दिन पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की गोलियों से मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी मौत की खबर ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया था और आज सिद्धू की पुण्यतिथि पर उनके फैंस की आंखें फिर से नम हैं। इस मौके पर उनके माता-पिता, प्रशंसक और संगीत प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। सिद्धू की मां चरण कौर ने इस अवसर पर सोशल मीडिया के जरिए अपने दिल का दर्द बयां किया, जो हर किसी के दिल को छू रहा है।

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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चरण कौर ने सोशल मीडिया पर अपने बेटे सिद्धू मूसेवाला और पति बलकौर सिंह के साथ एक पुरानी तस्वीर शेयर की और एक भावुक संदेश भी लिखा, जिसमें उन्होंने अपने बेटे के जाने के बाद की पीड़ा और खालीपन को शब्दों में ढालने की कोशिश की।

 

उन्होंने पंजाबी में अपने दिल के दर्द को शब्दों में बयां किया , जो हिंदी में इस प्रकार है। शुभ कभी तू जन्म लेने के बाद तीन दिन, तीन महीने और कभी तीन साल का हुआ था और हमारी जिंदगी में तेरी दस्तक ने हर मुश्किल से लड़ने की ताकत बढ़ा दी थी। और हमने हर मुश्किल तेरा चेहरा देख-देख हंस हंस कर पार कर दी। लेकिन आज तेरी तस्वीर से बाते करते मुझे तीन साल बीत गए और तेरे इंसान की भी आस करते तीन साल बीत गए, इन तीन सालों में जब कभी इंसाफ मिलने की किरण दिखाई दी तो वहीं बुरी तरह तोड़ दिया गया और इन तस्वीर सालों में बेहद एतराजयोग्य गतिविधियां बड़े लेवल पर इंटरनेट पर की गईं। जिन पर सख्त कार्रवाई होने की उम्मीद भी व्यर्थ गई। बेटा फिर भी हम कभी डोलते नहीं, हम अपने हक के लिए आवाज उठाते रहेंगे।
 

 

 

सिद्धू मूसेवाला की मां के इस पोस्ट में एक मां का टूटा हुआ दिल साफ झलकता है। सिद्धू के असमय जाने के बाद उनका परिवार आज भी उस गम से नहीं उबर पाया है और हर साल की यह तारीख उनके लिए एक याद बनकर नहीं, एक घाव बनकर लौटती है। 

 

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