मूवी रिव्यूः प्यार के उतार-चढ़ाव की कहानी है 'पल पल दिल के पास'

Edited By Smita Sharma, Updated: 21 Sep, 2019 07:42 PM

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एक्टर और सांसद सनी देओल के सुपुत्र फिल्म ''पल-पल दिल के पास'' से बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं। 20 सितंबर को रिलीज हुई इस फिल्म की पहले दिन की कमाई कुछ खास नहीं रही, लेकिन आइए एक नजर डालते हैं फिल्म के रिव्यू पर...

बॉलीवुड तड़का टीम. एक्टर और सांसद सनी देओल के सुपुत्र फिल्म 'पल-पल दिल के पास' से बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं। 20 सितंबर को रिलीज हुई इस फिल्म की पहले दिन की कमाई कुछ खास नहीं रही, लेकिन आइए एक नजर डालते हैं फिल्म के रिव्यू पर... 

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स्टोरी- वीडियो ब्लॉगर सहर सेठी (सहिर बंबा) माउनटेनर करन सहगल (करन देओल) के साथ यात्रा पर जाती हैं, लेकिन क्या इस दौरान उनके बीच पनपे प्रेम को उनकी मंजिल मिल पाती है। यही है फिल्म की कहानी। 


रिव्यू - इस फिल्म को खुद सनी देओल ने डायरेक्ट किया है और शायद इसलिए सनी देओल की पहली फिल्म 'बेताब' की तरह उनकी यह फिल्म 'पल पल दिल के पास' भी नार्थ इंडिया के पहाडों में शूट की गई है। करन सहगल मनाली में 'कैंप उज्ही' नामक ट्रैकिंग कंपनी चलाते है, जो टूरिस्ट और सेलेब्रेटी के बीच बहुत पापुलर है। दिल्ली में इंडिया की टॉप ब्लॉगर सहर के घर एक सालाना पारिवारिक मिलन समारोह होना है और वह इसका हिस्सा नहीं बनना चाहती और इसलिए वह 'कैंप उज्ही' से संपर्क करती है और ट्रेकिंग पर निकल पड़ती है। 

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इस यात्रा के दौरान पहले इन दोनों के बीच थोड़ी नौक-झौंक होती है, फिर प्यार हो जाता है। यह सब फिल्म के पहले हॉफ में हो जाता है। फिल्म की शूटिंग हिमाचल की हसीन वादियों में की गई है। दोनों लीड किरदारों ने आडियंस को बांधे रखने की बहुत ज्यादा कोशिश नहीं की है। करन का बिजनेस काफी शानदार है, लेकिन वह उससे बहुत ज्यादा खुश नहीं है। शुक्र है दो यंगस्टार्स ने एक्टिंग के मामले में थोड़ा ठीक-ठाक संभाल लिया है। करन देओल अनाथ हैं जो पहाडों में बड़ा हुआ है। भावुक सीन्स में वह काफी डीसेंट दिखे हैं, वो अपने डायलॉग बेहतर तरीके से बोलने की कोशिश करते दिखाई दिए हैं। एक्ट्रेस सहिर बंबा काफी कांफिडेंड और ग्लेमरस अंदाज में फिल्म में एंट्री करती हैं। वह भावुक सीन्स में काफी स्टरांग दिखाई देती हैं, फिल्म में कुछ कॉमेडी सीन भी हैं। 

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हालांकि, इनोसेंट पलों को यादगर बनाने के लिए मुख्य जोड़ी के बीच अच्छी कैमिस्ट्री क्रिएट नहीं हो पाई है, लेकिन फिल्म का संगीत मधुर है।  आखिर में फिल्म क्लाईमेक्स से गुजरती हुई आल आउट कंफ्रटेशन ड्रामा में बदल जाती है। 
 
फिल्म देखकर ये तो कहा जा सकता है कि डायरेक्टर सनी देओल एक सिंपल लव स्टोरी बनाना चाहते थे, हालांकि वह अगर कुछ बेहतर स्टार कास्ट को चुनते तो शायद स्टोरी परदे पर बेहतर दिखाई देती। 

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