ऋचा चड्ढा को दिल्ली हाईकोर्ट से फटकार, फ्लाइट में छेड़छाड़ के आरोप वाले पोस्ट को रीशेयर करना पड़ा महंगा

Edited By suman prajapati, Updated: 01 Apr, 2026 03:13 PM

richa chadha reprimanded by delhi high court

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा समेत कई लोगों को सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए फटकार लगाई है। मामला एक ऐसी घटना से जुड़ा है, जिसमें एक व्यक्ति पर फ्लाइट के दौरान कथित गलत व्यवहार के आरोप लगाए गए थे और बिना पूरी जांच के उसे...

मुंबई. दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा समेत कई लोगों को सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए फटकार लगाई है। मामला एक ऐसी घटना से जुड़ा है, जिसमें एक व्यक्ति पर फ्लाइट के दौरान कथित गलत व्यवहार के आरोप लगाए गए थे और बिना पूरी जांच के उसे सोशल मीडिया पर ‘छेड़छाड़ करने वाला’ तक कह दिया गया।


कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री ने एफआईआर की सीमाओं को पार कर दिया और तथ्यों की पुष्टि किए बिना ही व्यक्ति को दोषी ठहराने की कोशिश की गई। जस्टिस विकास महाजन ने इस तरह की पोस्ट्स को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि इससे न सिर्फ मामले को सनसनीखेज बनाया गया, बल्कि न्याय प्रक्रिया पर भी असर पड़ा।

अदालत के अनुसार, कुछ पोस्ट्स में संबंधित व्यक्ति की तस्वीर के साथ ‘मॉलेस्टर’ जैसे शब्द बड़े अक्षरों में लिखे गए थे, जिससे उसकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा। कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया मानहानि का मामला मानते हुए कहा कि इस तरह की पोस्ट्स किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा सकती हैं और उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित कर सकती हैं।

क्या है मामला?
यह पूरा मामला 11 मार्च की एक फ्लाइट से जुड़ा है, जिसमें एक महिला पत्रकार ने एक यात्री पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया था। हालांकि, आरोपित व्यक्ति ने इन सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह पूरी यात्रा के दौरान अपनी सीट पर ही था और फ्लाइट खत्म होने से पहले सो रहा था।

विवाद तब और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उस व्यक्ति की पहचान, फोटो और पेशेवर जानकारी सार्वजनिक कर दी गई, जबकि उस समय तक आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज भी नहीं हुआ था। इसके बाद इस पोस्ट को कई लोगों और मशहूर हस्तियों ने शेयर किया, जिससे मामला तेजी से फैल गया।

ऋचा चड्ढा ने भी इस पोस्ट को री-शेयर करते हुए टिप्पणी की थी, जिससे यह और ज्यादा वायरल हो गया। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के कदम किसी व्यक्ति के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि बिना जांच और सबूतों के किसी को दोषी ठहराना न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह कानून के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
 
 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!