Edited By Jyotsna Rawat, Updated: 18 Sep, 2026 01:16 PM

‘दायरा’ एक गंभीर विषय पर बनी फिल्म है, जो अपराध और इंसाफ के बीच के जटिल रिश्ते को समझने की कोशिश करती है।
फिल्म- दायरा (Daayra)
स्टारकास्ट- करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan), पृथ्वीराज सुकुमारन (Prithviraj Sukumaran)
डायरेक्टर- मेघना गुलज़ार (Meghna Gulzar)
रेटिंग- 3.5*
Daayra Film Review: ‘दायरा’ एक गंभीर विषय पर बनी फिल्म है, जो अपराध और इंसाफ के बीच के जटिल रिश्ते को समझने की कोशिश करती है। मेघना गुलज़ार का संवेदनशील निर्देशन, करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन की परफॉर्मेंस और फिल्म का गंभीर माहौल इसकी खासियत हैं।
हालांकि धीमी रफ्तार और कुछ जगह कहानी का खिंची हुई सी महसूस होती है। यह ऐसी फिल्म नहीं है जिसे सिर्फ मनोरंजन के लिए देखा जाए, बल्कि यह अपने विषय और सवालों के जरिए दर्शकों को सोचने का मौका देती है।
कहानी
मेघना गुलज़ार की ‘दायरा’ एक ऐसी कहानी लेकर आती है, जहां अपराध, कानून और इंसाफ की तलाश एक-दूसरे से टकराते हैं। फिल्म की कहानी एक गंभीर घटना के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है और उसके बाद शुरू होती है सच तक पहुंचने की कोशिश। यहां सिर्फ अपराध को दिखाना मकसद नहीं है, बल्कि उसके पीछे छिपे सवालों और सिस्टम की पेचीदगियों को भी सामने लाने की कोशिश की गई है।

फिल्म की कहानी में करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन के किरदार एक-दूसरे के आमने-सामने नजर आते हैं। दोनों की सोच, काम करने का तरीका और इंसाफ को देखने का नजरिया अलग है। यही टकराव फिल्म को आगे बढ़ाता है। कहानी जैसे-जैसे खुलती है, दर्शक के सामने कई सवाल आते हैं कि आखिर सच क्या है और कानून के दायरे में इंसाफ की सही परिभाषा क्या होनी चाहिए...
एक्टिंग
करीना कपूर खान फिल्म में अपने किरदार को काफी गंभीरता से निभाती हैं। उनके किरदार में एक मजबूत व्यक्तित्व के साथ-साथ भावनात्मक स्तर पर भी कई परतें हैं। करीना ने इन दोनों पहलुओं को बैलेंस करने की कोशिश की है। उनके एक्सप्रेशन और संवाद अदायगी कई जगह कहानी के तनाव को बनाए रखने में मदद करते हैं।
पृथ्वीराज सुकुमारन अपने किरदार में एक अलग तरह की गंभीरता लेकर आते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत है और करीना के साथ उनके सीन फिल्म की महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल हैं।

डारेक्शन
मेघना गुलज़ार की फिल्मों में गंभीर विषयों को संवेदनशील तरीके से पेश करने की कोशिश हमेशा दिखाई देती है और ‘दायरा’ में भी उनका यही अंदाज देखने को मिलता है। फिल्म में माहौल को ज्यादा ग्लैमरस बनाने के बजाय कहानी और किरदारों पर फोकस रखा गया है।
निर्देशन की खासियत यह है कि फिल्म जल्दबाजी में चीजों को खत्म नहीं करती। कई जगह कहानी को समय दिया गया है ताकि किरदारों की सोच और परिस्थितियों को समझा जा सके।