Edited By Jyotsna Rawat, Updated: 26 May, 2026 03:17 PM

बॉबी देओल की फिल्म 'बंदर' का ट्रेलर आउट होते ही, फिल्म की कहानी और इसके मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बॉबी देओल की फिल्म 'बंदर' का ट्रेलर आउट होते ही, फिल्म की कहानी और इसके मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। सवाल गंभीर है—क्या वाकई हमारे समाज में पुरुषों की भावनाओं को कचरे के डिब्बे में डाल दिया जाता है और उनके साथ सौतेला व्यवहार होता है, या फिर वे इसके हकदार हैं?
हम सब जानते हैं कि अनुराग कश्यप की फिल्मों के नाम जितने सीधे दिखते हैं, उनके मायने उतने ही गहरे और सिम्बॉलिक होते हैं। बॉबी देओल के साथ आ रही उनकी इस लेटेस्ट फिल्म का नाम 'बंदर' क्यों रखा गया, इसका अंदाजा आपको पहले ट्रेलर देखकर और फिर पूरी फिल्म देखकर ही लगेगा।
इस बीच, मेंस राइट्स और समान अधिकारों के लिए मुखर रहने वाली सोशल एक्टिविस्ट दीपिका नारायण भारद्वाज इस फिल्म के सपोर्ट में उतर आई हैं। उन्होंने इस बात पर रोशनी डाली है कि कैसे झूठे मुकदमों और आरोपों के चलते न जाने कितने ही पुरुष अंदर ही अंदर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि आज पुरुषों का मज़ाक उड़ाना इतना आम हो चुका है कि उनके इमोशनल अब्यूज, हैरेसमेंट, सामाजिक बेइज्जती और डिप्रेशन का समाज में सरेआम मज़ाक उड़ाया जाता है।
दीपिका के मुताबिक, यही वो सबसे बड़ी वजह है जिसके कारण आज के समय में 'बंदर' जैसी फिल्मों का पर्दे पर आना बेहद ज़रूरी और प्रासंगिक हो जाता है।
दूसरी तरफ, फिल्म डायरेक्टर रुचि नरेन इस मुद्दे पर दीपिका के दावों के खिलाफ खुलकर सामने आ गई हैं। उनका मानना है कि बॉलीवुड के पास पुरुषों को प्रोटेक्ट करने और उनका साथ देने का जिगरा हमेशा से रहा है, लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा नहीं देखा जाता क्योंकि उन्हें काम से और लाइमलाइट से बाहर कर दिया जाता है।